दिल रो रहा था अंधेरों में तन्हा,
Arabic Music sufi
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Lyrics
दिल रो रहा था अंधेरों में तन्हा,
नाम आया उनका तो चमका उजाला।
जब ज़िक्र-ए-नबी लब पे सजने लगा है,
हर ग़म का अंधेरा भी मिटने लगा है।
सरकार का दर है रहमत का साया,
जो आ गया यहाँ उसने सुकून पाया।
उनकी नज़र हो तो क़िस्मत जगाएं,
सोए हुए दिल भी धड़कन बन जाएं।
मदीने की गलियों का सपना सजा है,
हर आँसू वहाँ जा के मोती बना है।
मैं क्या हूँ, मेरी क्या हैसियत है,
सब उनका करम है, ये मेरी इज़्ज़त है।
दुरूद उन पे भेजो तो रहमत बरसती,
हर एक दुआ फिर क़ुबूल हो जाती।
चलो मिल के बस ये सदा हम लगाएं,
या नबी सलाम अलैका गाते ही जाएं