Krishnayan, Universal Form-2, Hindi 2461
Hindustani, Reed Organ, Tabla
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Lyrics
[Intro]
प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.
यह रूप लखे सब विश्व डरा, अति विस्मय का यह दर्शन है.
प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.
1
तुमने गल में मणि कांचन के, पहने शुभ हार सुगंध भरे.
तुमने वस्त्र पितांबर पहने, कर चक्र गदा असि शंख धरे.
प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.
2
तव आग भरा यह देह सखे! जिसमें बहु आनन दंत दिखे.
कर पाद अनेक विशाल जिसे, हरि! रूप बड़े विकराल दिसे.
प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.
3
तुमरे मुख में कटते नर हैं, कुछ दंतन में अटके सर हैं.
सब वीरों को तुम काट रहे, उनका तुम शोणित चाट रहे.
प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.
4
भगवान! मुझे तव रूप बड़ा, लगता धरती नभ तेज भरा.
तुमने रतनाकर! आज धरा, महिमा मय विष्वक् रूप खरा.
प्रभु! रूप विराट अनंत किया, किस कारण से यह धारण है.