Kaabil Ka Kaatil
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Lyrics
Verse 1
क्या तकलीफ़ है ख़ुदा तुमको
मेरे हँसते चेहरे से
मेरा तुम कुसूर बता दो
आँसू के ताल गहरे हैं
भूल क्यों रहे हो मुझे?
ख़ता मेरी ही क्यों दिखी?
इस दुनिया में सबसे
ज़्यादा मार मुझे क्यों पड़ी?
Pre-Chorus
कोई तो समझा दे मुझे
कोई तो बता दे मुझे
पुकार सुन लो तो ज़रा
Chorus
आग से तपते बदन पे
ताज़े लहू की धारें
काबिल का कातिल है कौन?
हाथ में रखूँ जिस पे
मिट्टी वो बन जाए
काबिल का कातिल है कौन?
Verse 2
क्या तकलीफ़ है ख़ुदा तुमको
मेरे कुछ पाने से?
मेरा तुम कुसूर बता दो
घाव अब दर्द दे रहे हैं
मुझको यूँ अकेला
छोड़ कर कहाँ जाते हो सभी?
इस दुनिया में सबसे प्यार करके
सज़ा मुझे ही क्यों मिली?
Pre-Chorus
कोई थाम ले तो मुझे
कोई हँसा दे मुझे
पुकार सुन लो तो ज़रा
Chorus
आग से तपते बदन पे
ताज़े लहू की धारें
काबिल का कातिल है कौन?
हाथ में रखूँ जिस पे
मिट्टी वो बन जाए
काबिल का कातिल है कौन?
Bridge
हाथ जोड़कर खड़ा हूँ मैं
रास्ता तुम दिखा दो
तकलीफ़, दर्द लिए रूह भी
थकी इल्ज़ाम और ताने से
एक बार तो इशारा दो
बस एक इशारा तो दो
हाथ जोड़कर खड़ा हूँ मैं
रास्ता तुम दिखा दो
Pre-Chorus
कोई तो आ जाओ मेरे
पास, दूर क्यों हो खड़े?
कैसे सुनोगे तुम पुकार?
Chorus
आग से तपते बदन पे
ताज़े लहू की धारें
काबिल का कातिल है कौन?
हाथ में रखूँ जिस पे
मिट्टी वो बन जाए
काबिल का कातिल है कौन?
कहीं मैं ही तो नहीं?
Last Chorus
आग से तपते बदन पे
ताज़े लहू की धारें
काबिल का कातिल है कौन?
हाथ में रखूँ जिस पे
सोना बन के दिखाए
काबिल का कातिल है कौन?
Outro
कहीं मैं ही तो वो नहीं?
कहीं मैं ही तो वो नहीं?
काबिल का कातिल है कौन?
ओह…
कहीं मैं ही तो वो नहीं?
कहीं मैं ही तो वो नहीं?
काबिल का कातिल है कौन?