月光のラーガ5.1(ヒンディー語版)
Classical, Indian Classical Fusion
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Lyrics
[Verse 1]
चाँद की रोशनी खिड़की को रंग दे
मन की लहरें चुपके से उठती हैं
सितार की धुन हवा में बहती
दूर की यादें फिर से जागती हैं
[Pre-Chorus]
टिमटिमाते तारे जैसे
समय की धारा को देखते हों
मेरे हाथों पर जो गर्माहट है
क्या वह तुम्हारी कोई छवि है
[Chorus]
चाँदनी का राग बजाएँ हम
अनंत प्रेम का गीत गाएँ
दर्शनियों सी तेरी निगाहों में
मेरी रूह पिघलती जाती है
[Verse 2]
तबला की ताल धड़कन से मिलकर
मेरी प्रार्थना नभ में उड़ती है
वीणा की धुन रात में गूँजे
प्रियतम का नाम पुकारती है
[Pre-Chorus]
फूल खिले और फिर मुरझाएँ
कुछ तो है जो बदलता नहीं
रंग फीके पड़ जाएँ चाहे
तुमसे मेरा प्यार न बदले
[Chorus]
चाँदनी का राग बजाएँ हम
अनंत प्रेम का गीत गाएँ
दर्शनियों सी तेरी निगाहों में
मेरी रूह पिघलती जाती है
[Bridge]
राग बिहाग की हल्की उदासी
राग यमन की मधुर खुशी
पर तुमसे मेरा जो प्रेम है
वह एक ही सुर है—सदा चलता
[Chorus – Repeat]
चाँदनी का राग बजाएँ हम
अनंत प्रेम का गीत गाएँ
दर्शनियों सी तेरी निगाहों में
मेरी रूह पिघलती जाती है
[Outro]
चाँदनी का राग धीरे-धीरे
रात के छोर तक बहता जाए
प्रेम है अनंत, राग भी अनंत
चाँद की छाया में सो जाएँ