दो-भारत
Hard-hitting / Soulful Rap
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Lyrics
(Intro - एक उदास बांसुरी की धुन और भारी किक ड्रम)
(Voiceover: "साहब, ये सिस्टम सिर्फ उनके लिए है जो इसे खरीद सकते हैं...")
एक देश, दो कानून, दो अलग कहानियाँ,
एक की मजबूरी, दूजे की मनमानियाँ।
एक का पसीना, दूजे का आराम है,
ये आम आदमी के नाम, मेरा पैगाम है!
(Chorus)
ये कैसा देश है मेरा? ये कैसी रीत है?
गरीब की हार यहाँ, अमीर की जीत है।
लाख के लोन पर कॉलर पकड़ लेते हैं,
करोड़ों के चोरों को रास्ता छोड़ देते हैं!
कहाँ है इंसाफ? कहाँ है समानता?
सिस्टम यहाँ सिर्फ दौलत को पहचानता!
(Verse 1 - गरीब की हालत)
बेटी की शादी हो या छोटा सा व्यापार,
बैंक की चौखट पे खड़ा वो लाचार।
एक लाख का कर्ज, सौ कागज़ों का ढेर,
किस्त जो चूकी, तो बन जाते सब शेर!
घर के बाहर खड़ी होती नीलाम की गाड़ी,
इज्जत उछालते, जैसे हो कोई खिलाड़ी।
वो किसान, वो मजदूर, वो छोटा दुकानदार,
फांसी के फंदे पे झूलता, होकर शर्मसार!
उसकी कॉलर पे हाथ, उसकी आँखों में पानी,
यही है इस सिस्टम की रद्दी कहानी।
(Verse 2 - अमीर की रफ़्तार)
अब देखो तस्वीर का दूसरा पहलू,
बड़े-बड़े बंगले और सूट-बूट वाले 'साहू'।
हजारों करोड़ों का डकार लिया माल,
बैंक वाले उनके आगे बिछाते हैं लाल (Carpet)!
फर्स्ट क्लास का टिकट, वीआईपी है एंट्री,
फ्लाइट पकड़ी और छोड़ दी अपनी ये कंट्री!
वहाँ लंदन की सड़कों पे वो जाम छलकते हैं,
यहाँ फाइलें दबीं, और अफसर बहकते हैं।
वो भाग गया 'मेहुल', वो उड़ गया 'विजय',
सिस्टम के सन्नाटे में, उनकी ही है जय!
(Bridge - Intense and Emotional)
गरीब की थाली से रोटी छीन लेते हो,
अमीर को तुम सोने की गोटी देते हो।
जिसके पास कुछ नहीं, उसे डराते हो,
जो लूट के गया, उसे भूल जाते हो?
(Chorus)
ये कैसा देश है मेरा? ये कैसी रीत है?
गरीब की हार यहाँ, अमीर की जीत है।
लाख के लोन पर कॉलर पकड़ लेते हैं,
करोड़ों के चोरों को रास्ता छोड़ देते हैं!
(Outro - Heavy Breath and Fading Beat)
बदलो इस सोच को, बदलो ये विधान,
वरना मिट्टी में मिल जाएगा, आम इंसान का मान।
कलम बोलती है, आवाज़ उठाओ,
इस सोए हुए सिस्टम को, अब तुम ही जगाओ!
(Sound of a gavel banging - 'Order Order')