"चेहरा भोला, चाल सीधी, आँखों में गंगा-जल है,
पर भाई संभल के रहना, ये कलयुग का असली दलदल है।
बाहर से जो गाय जैसा सीधा दिखाई देता है,
अंदर ही अंदर वो सबकी लंका लगा देता है।
वो जो मंदिर में सबसे आगे झुककर बैठता है,
यकीन मान, वही दूसरों के चप्पल का साइज़ देखता है।
वो शरीफ है, क्योंकि उसका फोन अभी 'लॉक' है,
वर्ना उसकी हिस्ट्री देखना, दुनिया का सबसे बड़ा शॉक है।
दोस्त! यहाँ शराफत की परिभाषा अब बदल गई है,
सच्चाई तो बेचारा 'गूगल' भी ढूंढते-ढूंढते थक गई है।
शरीफ वही है, जिसका अभी तक कांड नहीं पकड़ा गया,
बाकी जो पकड़ा गया, वो बेचारा फालतू में जकड़ा गया!"